60 हजार वर्ष की साधना से भी ऊँची उपासना | This worship is greater than 60000 years of Sadhana | श्री योगवासिष्ठ महारामायण | Yoga Vasistha Maharamayana
https://youtu.be/vEDZV28A0xM पूज्य बापूजी कहते हैं... जिस उपासना से देवों को देवत्व मिला है, सिद्धों को सिद्धियां मिलती है, बुद्धि मानव को बुद्धि मिलती है। बुद्धिया बदल जाती है, सिद्धियां बदल जाती है लेकिन फिर भी जो नहीं बदलता हम उस शांति स्वरूप चैतन्य परमात्मा की उपासना करते हैं। आधा घंटा रोज ध्यान करना ही चाहिए। साधना से ऊंचे विचार, ऊंचे विचार से ऊंचे कर्म। ऊंचे फल को भी ईश्वर को दे दिया तो ईश्वर ही फल स्वरुप मिल जाएंगे।आप यदि ईश्वर में टिक गए तो किसीकी जरूरत नहीं यह 60 हजार वर्ष की साधना से भी ऊंची उपासना है। लेकिन रुचि नहीं है साक्षात्कार में। दृष्टा, दर्शन और आनंद लेने की जो वासना है उसका त्याग करोगे तभी उसमें टिकोगे। वास्तव में स्वत: आनंद का मूल हम हैं। यह जगत आभास मात्र है और अपनी वृत्ति से ही सब भासता है। वृत्तियों में ही सुख दुख होता है। वृत्तियों में ही इच्छा वासना होती है। वृत्ति के मूल में टिक गए तो इच्छाओं का महत्व नहीं रहेगा। वासना का महत्व नहीं रहेगा जीवनमुक्त हो जाएगा जिसको वैराग्य और विचार है संसार का राग, आकर्षण नहीं है और सद् विचार है वही आत्म...