प्रातः संध्या सत्संग सार 22 May 2021

 Title- हो जा अजर हो जा अमर




पूज्य बापूजी कहते हैं...


  • जिज्ञासु दो प्रकार के होते हैं...(1) कृत उपासक (2) अकृत उपासक
  • शरीर में पित्त और कफ अधिक है तो आदमी मोहित होता है। वात अधिक है तो काम ही हो सकता है। आकाश तत्व ज्यादा है तो कामी और क्रोधी हो सकता है।
  • जैसे कपडे से रुई निकाल दो तो कपड़ा नहीं बचता वैसे ही शरीर से पंचभूत निकाल दो तो शरीर नहीं बचेगा। फिर भी मैं बचता हूं।
  • माला करना, जप-तप करना यह आवांतर साधन है। लेकिन प्रत्यक्ष साधन तो आत्मज्ञान है।
  • वह ईश्वर जब जब सुनता है तो वह तुम्हारी अंतर्मुखता से ही सुनता है। जब जब आता है तो तुम्हारे दिल के द्वारा ही आता है।
  • अहंकार कभी तो मित्रों को मेरा मान कर गर्व लेता है। कभी विद्या को मेरा मानकर गर्व लेता है। कभी मकान को मेरा मानकर गर्व लेता है। कभी बैंक के पैसे को मेरा मानकर गर्व लेता है।
  • अष्टावक्र जी ने माता के गर्भ से ही घोषणा कर दी कि मैं शुद्ध हूं, मैं बुद्ध हूं, मैं अजन्मा हूं, मैं निर्विकार हूं, मैं चैतन्य हूं। मदालसा के पुत्रों को मदालसा ने पयपान कराते हुए ही घोषणा कर दी और हम 40-40 साल के बैल हो गए 30-30 साल के हो गए 50 50 साल के हो गए और अपने को आत्मा मानने में डरते हैं। चिदानंद रूपं शिवोहम शिवोहम्...
  • जैसे दिया प्रकाशता है ऐसे ही तुम्हारा साक्षी सबको प्रकाशता है।
  • गुरु के भक्त सब अमीर हो यह जरूरी नहीं है गरीब भी हो सकते हैं लेकिन गुरु के भक्त बेवकूफ नहीं हो सकते।
  • तुम उस परमात्मा की रोशनी में अपना रास्ता तय कर लो तो समझ लेना की तुम किसी गुरु के शिष्य हो नहीं तो तुम मन के शिष्य हो। गुरु के शिष्य हो जाना कोई कठिन बात नहीं है। लेकिन ऊपर ऊपर से बनते हैं भीतर से मन के शिष्य हो जाते हैं हम।

आज प्रातः संध्या का सत्संग आप मंगलमय एप के द्वारा भी सुन सकते हैं। 

Satsang

Date: May 22, 2021

Session: Morning 



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रातः संध्या सत्संग सार 22 June 2021

प्रातः संध्या सत्संग सार 31 May 2021

प्रातः संध्या सत्संग सार 26 May 2021