प्रातः संध्या सत्संग सार 31 May 2021

 Title सूक्ष्म सत्य SIDE - A


पूज्य बापूजी कहते हैं...

  • भक्ति मार्ग में दिनभर भगवदाकार वृत्ति बने इसलिए भिन्न-भिन्न पूजा का विधान कर दिया गया है। ताकि भक्तों की भगवदाकार भावना बन जाए।
  • योग मार्ग में आसन आदि करके रजोगुण को हटाया जाए नहीं तो योग करते समय नींद आएगी। आसन से स्थूल निद्रा का त्याग और प्राणायाम से सूक्ष्म निद्रा पर विजय। योग मार्ग वालों के लिए यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रतिहार, धारणा, ध्यान और समाधि यह 8 नियम होते हैं।
  • सूर्योदय से 2:15 घंटे पहले साधक को उठ जाना चाहिए। और यह हरि की भक्ति में, ध्यान में बैठना चाहिए। जो लोग 4 बजे के बाद भी सोते रहते हैं उन्हें ब्रह्मचर्य में प्रॉब्लम होता है। वह निस्तेज हो जाएंगे।
  • भक्ति मार्ग वालों को भी ध्यान तो करना ही पड़ता है। योग वालों को तो ध्यान करना ही करना है। मुख्य उसका ध्यान है। वेदांत वाले का मुख्य वेदांत है लेकिन ध्यान तो उसको भी जरूरी है।
  • शबरी गुरु आश्रम में रही तो अध्यात्मिक रास्ते में कितनी महान बन गई। दूसरी कोई घर में रहकर इतनी भक्ति किया हो और महान बनी हो यह संभव नहीं है। हां संभव है सती अनुसूया महान थी। उनके पति ऋषि थे। उनका घर नहीं था आश्रम था। पति के साथ रहकर अरुंधति महान बन गई क्योंकि उनके पति ब्रह्मज्ञानी थे अरुंधति भी कम नहीं थी पार्वती जी के साथ सत्संग करने की क्षमता थी। तभी वह महान बने। यह क्षमता लाने के लिए भी तो उन्होंने भजन तप किया था।
  • हमारा आध्यात्मिक विकास 10 चीजों से होता है। (1) आप कैसी जगह पर रहते हैं? (2) आप साहित्य कैसा पढ़ते हैं? (3) जप कौन सा करते हैं? (4) भोजन कैसा करते हैं? (5) दृश्य कैसा देखते हैं? (6) संग कैसे लोगों का है? इस प्रकार 10 चीजों का मन पर पतन या उत्थान का असर पड़ता है।
  • जब तक इस पर साक्षात्कार नहीं हुआ तब तक संग दोष का प्रभाव पड़ता है। हे रामजी, साधु भी अगर शादियों में जाए तो असाधु हो जाएगा। और असाधु भी मसान में जाए तो साधु होगा।

आज प्रातः संध्या का सत्संग आप मंगलमय एप के द्वारा भी सुन सकते हैं। 

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Satsang: 

Date: May 31, 2021

Session: Morning 


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