प्रातः संध्या सत्संग सार 26 May 2021

Title - विवेक दर्पण







  • जिनको वृद्धा अवस्था दिखती है, जिनको मौत दिखती है, जिनको गर्भवास का दुख दिखता है, जिनको संसार की नश्वरता दिखती है, जिनको यह संबंध स्वप्नवत दिखते हैं ऐसे जो साधक है वह मोह में, आडंबर में ना पडकर, विलास में और दिखावे में न पडकर वह परमात्मा की गहराई में जाने की कोशिश करते हैं। 
  • जो कर्म करने से चित्त परमात्मा से विमुख हो सच्चा जिज्ञासु सच्चा भक्त वह कर्म नहीं करता। जिस मित्रता से भगवतप्राप्ति ना हो उस मित्रता को शूली की शैया समझता है
  • ईश्वर के लिए जगत छोड़ना पड़े तो छोड़ देना लेकिन जगत के लिए ईश्वर को कभी मत छोड़ना।
  • परमात्मा के लिए मित्र छोड़ना पड़े तो छोड़ देना लेकिन मित्र के लिए परमात्मा को न छोड़ना।
  • ईश्वर के लिए प्रतिष्ठा छोड़नी पड़े तो छोड़ देना लेकिन प्रतिष्ठा के लिए ईश्वर को मत छोड़ना। स्वास्थ्य और सौंदर्य परमात्मा के लिए छोड़ना पड़े तो छोड़ देना लेकिन स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए परमात्मा को ना छोड़ना।
  • सत्य और परमात्मा का बलिदान देकर जो कुछ भी पाया है वह सब तुमने अपने साथ जुल्म किया है। ईश्वर को छोड़कर जो तुम कहीं अपना दिल लगा रहे हो तो तुम अपने साथ शत्रुता कर रहे हो।
  • कौन क्या करता है?कौन क्या कहता है? इस झंझट में मत पडो। जो मिट्टी से पैदा हुआ है , मिट्टी में घूम रहा है और मिट्टी में ही मिलने को बढ़ रहा है उसी का नाम, गांव, पंथ, संप्रदाय पूछकर लोग अपना भी समय समय गंवाते हैं और संतों का भी समय गंवा देते हैं।
  • ईश्वर के राज के सिवाय परमात्मा के पद के सिवाय आज तक तुमने जो बटोरा है और आज के बाद जो तुम बटोरोगे। आज तक तुमने जो जाना है और आज के बाद जो जानोगे। आज तक जो तुमने संसारी चीज पाई है और आज के बाद जो पाओगे, मृत्यु के एक झटके में सब छूट जाएंगे।
  • तुम केवल परमात्मा की हां में हां मिलाकर तो देखो। गुरु की हां में हां मिलाकर तो देखो कि तुम कितने महान हो सकते हो। गुरु तुम्हें कहते हैं कि तुम अमृत पुत्र हो फिर तुम क्यों इंकार करते हो?

आज प्रातः संध्या का सत्संग आप मंगलमय एप के द्वारा भी सुन सकते हैं। 

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Satsang 

Date: May 26, 2021

Session: Morning 





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