प्रातः संध्या सत्संग सार 12 May 2021
पूज्य बापूजी कहते हैं...
भगवान श्री कृष्ण कहते हैं जिनको सत्संग नहीं मिलता आत्मा को जानने की कोशिश नहीं करते वह सब तुच्छ जंतु जैसे हैं। यह बोध हो जाए कि मेरा मूल स्वरूप क्या है? फिर जीवन की कोई खास स्थिति का आग्रह ही नहीं रहेगा। ऐसे आत्मा वेत्ता पुरुषों की तुलना किससे करोगे? अहम् रहित ही वास्तविक जीवन है उसके पहले तो गुलामी ही है भगवान, भोग, स्वर्ग मिले यह भी गुलामी है।अहम गया तो सारी गुलामी गई सारे दुख अहम् में, सारी मुसीबतें, जन्म मरण सब अहम् में है। अपने असली स्वरूप में तो मौज ही मौज है। सारी आपदाओं को अहंकार ही ढोता मैं कौन हूं यह जान लिया तो अभी ईश्वर हो। जो जल्दबाज है और विवेक नहीं रखते उनको अहंकार रूपी पिशाच खा जाता है। बड़े-बड़े साधु महात्मा भी अहंकार रूपी पिशाच के डर से समाधि में स्थित हो जाते हैं। वासना अहम् में होती है। अहम् मिटा तो वासना मिटी। ज्ञान से ही वासना बाधित होगी। अहम् भी ज्ञान से बाधित होगा। गुरु की आज्ञा भी अहम् विसर्जन में बड़ी मदद करती हैं। मुझ पर तो बहुत कृपा हुई गुरु की आज्ञा का महत्व रखने से अहम् विसर्जन में बड़ी सुविधा मिली। एक तो गुरु जी की कृपा और दूसरा संत भी ऐसे ही मिले। चाहे 10 बार चार धाम की यात्रा करो लेकिन फिर भी इतना पुण्य और शांति नहीं मिलती जितनी संतो के चरणों में बैठने से मिलती है।
जगत की चीजों में अपनी चाह, अपनी कल्पना और अपनी मेहनत में उलझ जाना है। जगत की चाह में तो कल्पना होती है जिसको जगत की चीज वस्तुओं की तरफ आकर्षण है समझो उसको बहुत जन्म लेने हैं, बहुत मजदूरी करनी है और आखिर में थका देगी। लेकिन जिसको जगत की चीजें व्यवहार के लिए खा लिया, पढ़ लिया लेकिन सुख स्वरूप मेरा आत्मा है, चैतन्य है, आनंद स्वरूप है और भगवत् साधना में मन शांत हो रहा है उसको कम मेहनत में अंतरात्मा का सुख मिलता है।
आज प्रातः संध्या का सत्संग आप मंगलमय एप के द्वारा भी सुन सकते हैं।
🎼🎼 Audio 🎼🎼
🎼🎼 Sandhya Audio 🎼🎼
Satsang:
Date: May 12, 2021
Session: Morning
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HariOm
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