प्रातः संध्या सत्संग सार 18 May 2021
Title - परमात्मा का स्वरूप Side-A
पूज्य बापूजी कहते हैं...
- सूरज से हमारा शरीर जुड़ा हुआ है। यह सूरज और शरीर नाश हो जाए फिर भी हमारा नाश नहीं होता।
- सिद्धावस्था पाना कठिन नहीं है लेकिन तुच्छ अवस्था की सत्यता छोड़ना कठिन हो रहा है।
- भगवान के दर्शन हो जाए फिर भी अपने स्वरूप का बोध नहीं होगा तो मजदूरी बाकी रहेगी। और किसी के दर्शन ना हुए हो लेकिन अपने स्वरूप का बोध हो गया तो सब एक साथ अपने आप मिलेंगे।
- ब्रह्मा विष्णु महेश और 33 करोड़ देवता ज्ञानी के स्वरूप में अध्यस्त होते हैं।
- दुनिया भर के सब विज्ञानी, सब बुद्धिमान व्यक्तियों की बुद्धियां जहां सोच सोच कर खत्म हो जाए आगे रास्ता ना मिले वहां से ब्रह्मज्ञान शुरू होता है।
- जैसे सभी जगह आकाश एक है, वैसे ही चिदाकाश आत्मा एक है। वही जीव का वास्तविक स्वरूप है उसको नहीं जानता इसलिए थोड़ा थोड़ा सुख-दुख परेशान कर देता है।
- परमात्मा तत्व के आगे इंद्र का राज भी कुछ नहीं । ब्रह्माजी के 1 दिन में 14 इंद्र बदलते हैं ऐसे हजारों ब्रह्माजी जिस ब्रह्म में पैदा होकर लीन हो गए वह है ब्रह्मसाक्षात्कार ।
- मनुष्य का 1 साल बितता है तब देवताओं का एक दिन होता है। ऐसे देवता 100 साल जीते हैं। हमारे 365 वर्ष बीतते हैं तब उनका 1 वर्ष होता है ऐसे 100 साल देवता जीते हैं। वह ब्रह्म आत्मा अपना आत्मा है।
आज प्रातः संध्या का सत्संग आप मंगलमय एप के द्वारा भी सुन सकते हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें