प्रातः संध्या सत्संग सार 21 May 2021

 

 



पूज्य संत श्री आशारामजी बापू कहते हैं... 


  • जिसको ज्ञान की कदर है उसको गुरु की कदर होगी। जिसको अपने आत्मा की कदर है अपने जीवन की कदर है उसको गुरु की कदर होगी। जिसको मनुष्यता की कदर है उसको गुरु की कदर होगी। यदि पशु होकर भटकना है तो फिर कोई बात नहीं। कई जन्मों में माता के गर्भ में लटकना हो तो फिर गुरु से जो भी करते हो करो।
  • आदि गुरु शंकराचार्य जी कहते हैं .. (1) मनुष्यता का सद्गुण आए (2) मोक्ष की इच्छा हो (3) महापुरुषों का आश्रय यह तीनों मनुष्य लोक में दुर्लभ है।
  • जवानी में आराम प्रिय होगा तो जल्दी बूढ़ा बनेगा और जरा जरा बात में बीमार हो जाएगा। परिश्रम करो। बीमार होना पिछले जन्म का पाप का फल है या तो बेवकूफी का फल है।
  • कोई मन से बीमार होता है, कोई शरीर से, कोई बुद्धि से बीमार होता है। बुद्धि से बीमार होना बड़ी तबाही है। गलत निर्णय रना बौद्धिक बीमारी है। गलत चिंतन करना या मानसिक बीमारी है। और गलत खानपान करना यह शारीरिक बीमारी है।
  • सेवा और आध्यात्मिकता से जी कतराता है तो आपका भविष्य अंधकारमय है।
  • दोष दर्शन का पाप जब बुद्धि में घुसता है तो गुरुद्वार पर रहने नहीं देता। किसी के प्रति दोष दर्शन आ जाए तो वह ज्यादा दिन गुरुद्वार पर रह नहीं सकेगा। पाप ले भागेगा तुमको। दोष दर्शन करने वाला व्यक्ति निस्तेज हो जाता है।
  • ईश्वर सर्वव्यापक है, सदा है, परम हितेषी है और परम सुह्रद है यह पक्का मान लो।
  • हम यदि कर्म के कर्ता बनेंगे तो उसके भोक्ता भी होंगे, सुख दुख भी होंगे, पुण्य पाप भी होगा, जन्म मरण भी होगा। कर्म तो करें लेकिन भगवद अर्पण करे। कर्म के फल को अपने तरफ ले आएंगे तो विक्षेप होगा, अहंकार पुष्ट होगा, राग द्वेष पुष्ट होगा, शत्रु मित्र भाव पुष्ट होगा।
  • कोई भले शत्रुता करके हमारा कुप्रचार या हमको दुख दे लेकिन अपने हृदय में शत्रुता ना होने से हमको दुख नहीं होगा प्रकृति फिर उल्टा वार उन्हीं पर कर देती है।

आज प्रातः संध्या का सत्संग आप मंगलमय एप के द्वारा भी सुन सकते हैं। 

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