प्रातः संध्या सत्संग सार 24 May 2021
Title- वास्तविक जीवन भाग 2
पूज्य बापूजी कहते हैं...
- संसार की विद्या पढ़ने के बाद उसको याद रखना पड़ता है और याद ना करो तो कम हो जाती है भूल जाते हैं। धन कमाने के बाद उसे ब्याज पर रखा जाता है तो बढ़ता है और कोई खतरे वाली पार्टी में रखो तो ब्याज सहित धन गायब हो जाता है। लेकिन यह ब्रह्मविद्या का धन ऐसा है कि उसकी स्मृति करो चाहे ना करो यह आत्मज्ञान एक बार आ गया फिर अपने आप बढ़ता जाता है। मन की वासनाए तब तक नहीं मिटती जब तक हम ईश्वर या गुरु के ज्ञान में अपने अहम को अर्पित नहीं करते।
- जिसका मन विषयों में बंधा है, जीव भाव में बंधा है, मत पंथ और संप्रदाय की बातों में बंधा है, मेरे तेरे में बंधा है ऐसे व्यक्तियों के संग में हम निर्बंध नहीं होते। जिनका मन विषय विकारों को बाधित करके अपने आत्मा में विश्रांति पाया है निर्बंध तत्व का जिन महापुरुषों ने साक्षात्कार किया है ऐसे महापुरुषों की एक मुलाकात भी जीवन की तमाम उलझनों को पार कर देती है और नया सूर्य उदय हो जाता है।
- यह ब्रह्मविद्या पचवाने के लिए गुरुओं को क्या-क्या करना पड़ता है? कहां-कहां की कहानियां, दृष्टांत, घटनाएं लाते हैं ताकि शायद यह जीव जग जाए बेड़ा पार हो जाए।
- जितना व्यक्ति आत्म साक्षात्कार या प्रभु पाना कठिन समझता है उतना कठिन नहीं है यदि हम बीती हुई बात को याद ना करें और आने वाले प्रसंगों को चिपके नहीं तो आपका मन शांत होना आसान हो जाएगा और शांत मन में आनंद और सर्जन का सामर्थ्य आ जाता है।
- हम बच्चों को सुधारने में लगे हैं, पत्नी को सुधारने में लगे हैं, पति को सुधारने में लगे हैं पहले अपने मन को सुधारो फिर अपने आप ऑटोमेटिक और लोग सुधरने लग जाएंगे।
- विषयों की आसक्ति, जगत में सत्य बुद्धि यह बंधन का कारण है और विषयों में वैराग्य बुद्धि और परमात्मा में सत्य बुद्धि यह मुक्ति का कारण है। हमारा मन ही बंधन का कारण है और हमारा मन ही मुक्ति का कारण है। इसी मन से आप परब्रह्म परमात्मा का साक्षात्कार कर सकते हैं।
आज प्रातः संध्या का सत्संग आप मंगलमय एप के द्वारा भी सुन सकते हैं।
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