प्रातः संध्या सत्संग सार 25 May 2021
Title - अपने आप में बैठो
- आप सांकेतिक भाषा समझे या विस्तार से समझे लेकिन बात यह समझनी है कि मनुष्य जन्म कीमती है उसकी एक-एक क्षण का सदुपयोग करो।
- अच्छे में अच्छी जगह वह मानी जाती है जहां परमात्मा बसता है। परमात्मा रहते कहां है? सामान्य रूप से परमात्मा सब जगह रहते हैं लेकिन विशेष रूप से प्रकट होते हैं हृदय में। वेदांत जैसा और कोई सरल ज्ञान नहीं है लेकिन हमारा उल्टे ज्ञान का अभ्यास इतना पक्का हो गया है सुलटा ज्ञान कठिन लग रहा है और उल्टा आसान।
- आत्मा परमात्मा को जानकर परमात्मा में एक हो जाना बड़ा सरल है यह अत्यंत सरल बात कठिन लग रही है। इसको जान लिया तो बस... 33 करोड़ देवता तो भोगो के पीछे गए तुम भोगो से पृथक भोगो के साक्षी भोगो के बाप बन गए। दुख और सुख का जो स्वामी बनेगा उसका दुख क्या कर सकेगा?
- सुख-दुख जो भी आता है उसे पसार होने दो अपने आप को उससे चिपकाओ मत। हम लोग अपने को सुख दुख में चिपका देते हैं इसीलिए अत्यंत सुलभ जो परमात्मा शांति है वह कठिन हो गई।
- विषयों की इच्छा हमसे चापलूसी कराती हैं और परमात्मा का ज्ञान हमारे द्वारा प्रेम प्रकट करवा देता है।
- अपने शरीर के साथ अन्याय ना करो। दूसरों के शरीर के साथ अन्याय ना करो। यथा योग्य जो अंग काम आते हैं उनका ठीक-ठीक जजमेंट दो लेकिन आप अपनी सीट पर बैठो। अपने मैं में बैठो। अपने मैं अपने साक्षीत्व में बैठो तो बाकी जो व्यवहार है वह ठीक से होगा। संसार में सब सुख के लिए लगे हैं लेकिन देखो तो सब दुखी के दुखी।
- उदर की चिंता, प्रिय व्यक्ति की चर्चा, जिसका वियोग हो गया उसकी यादें यह सब तुम्हारी वहीं समाप्त हो जाएगी अगर आप अपने आप में आ जाते हो तो।
- हमको परिस्थितियां तभी कुछ चलती है जब हम अपने आप में नहीं होते। आप आत्मा में डट जाओ तो विपरीत से विपरीत परिस्थिति, महान दुख की परिस्थिति भी आपको दुख नहीं दे सकेगी। सुख में बदल जाएगी। आप अगर आत्मा में डट गए तो आपका शत्रु भी बदल जाएगा। नहीं बदला तो प्रकृति उसके हाल बेहाल कर देगी।
- शत्रुओं से निपट कर भजन नहीं होगा। मित्रों को मिलने के बाद भजन नहीं होगा। सेफ डिपॉजिट कर के फिर आराम से भजन नहीं होगा। भजन तो आप चलते फिरते पवित्र जगह पर बैठ जाओ बस...
- अपने को कर्मों के कर्ता ना मानो दृष्टा बना लो। करने वाला मन है, शरीर है। इनकी चेष्टा को आप देखोगे तो यह थक जाएंगे और आपकी शरण हो जाएंगे। जिसने तन मन को वश कर लिया वह तो भगवान हो गया और क्या? वह तो नारायण का अंग है।
- कमजोर विचार को शत्रु समझकर काट डालो। दुर्बलता के विचार कभी सत्य नहीं हो सकते। घृणा के विचार आए उसी समय उसे उखाड़ दो। मैं नहीं कर सकता हूं ऐसा विचार आए तो उस समय पिस्तौल रखो। हृदय में दुर्बल विचार आए तो उसी समय ज्ञान की पिस्तौल चला दो। ॐ ॐ ॐ उसकी गोली है।
- ॐ मंत्र में करोड़ों शरीर गिराने की ताकत है।
आज प्रातः संध्या का सत्संग आप मंगलमय एप के द्वारा भी सुन सकते हैं।
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HariOm
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