प्रातः संध्या सत्संग सार 27 May 2021

 Title - जड़ चेतन ब्रह्म का अर्थ स्वरूप 


  • तुम्हारे आत्मा में अथाह शक्ति है। मन जैसा बार-बार चिंतन करता है वैसा रूप ले आता है। अनेक में एक का दर्शन ज्ञान मार्ग वालों का यह ध्यान है।
  • मैं एक का एक हूं ऐसा पक्का ध्यान करने से बाकी का अनेक होते हुए भी एक में मन ठहर जाएगा। यथार्थ तत्ववेत्ता नहीं मिलते तब तक धर्म के नाम पर आदमी कोल्हू के बैल की तरह घूमता रहता है। जब ज्ञानी मिल जाते हैं तब बस...
  • जिसमे सहनशक्ति नहीं है ज्ञान की धारणा नहीं है वह धनवान होते हुए भी गरीब है, पढ़ा हुआ भी मूर्ख है और धार्मिक होते हुए भी नास्तिक है।
  • संसार में उथल-पुथल होती रहती है लेकिन ज्ञान में समझ की शक्ति है धैर्य है कि आखिर यह भी गुजर जाएगा।
  • यह भी नहीं रहेगा यह भी गुजर जाएगा आखिर यह भी कब तक? इतना यदि याद हो जाए तो बड़ी मदद करता है और फिर चित्त एकाग्र हो जाता है।
  • ओंकार की और परमात्मा के नाम की अलग अलग ढंग से शास्त्रों में व्याख्या है। किसी भी मंत्र का जप करते हुए यदि उसमें ओमकार मंत्र नहीं है तो वह मंत्र अधूरा है। आत्मज्ञान नहीं करा सकेगा। ओम परमात्मा का शुरुआती नाम है।
  • हमारा तुम्हारा तब होता है जब हम अपने मैं को ठीक से नहीं देखते है। अपने शुद्ध मैं को अज्ञान से मार डालते हैं। इस शुद्ध मैं का नाम ही ईश्वर है।
  • सृष्टि के मूल में चार तत्व है- पृथ्वी, जल, तेज, वायु
  • जिसके अंदर में आत्मा का ज्ञान प्रगट होता है उसको पता चलता है कि ब्रह्मा कहीं उधर बैठकर सृष्टि पालन नहीं करते, संहार नहीं करते। इस मनीराम का नाम ही ब्रह्मा है। इसी की सृष्टि बनाई हुई है। इस चेतन आत्म देव की सत्ता लेकर जो फूरना फूरता है वह माया है और माया में मनन होने लगता है तो मन यह मनीराम की सृष्टि बनाई हुई है।

आज प्रातः संध्या का सत्संग आप मंगलमय एप के द्वारा भी सुन सकते हैं। 

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Satsang

Date: May 27, 2021

Session: Morning 



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