प्रातः संध्या सत्संग सार 4 June 2021

 Title- अपने आपमें बैठो Side-B



पूज्य बापूजी कहते हैं... 

  • उदर की चिंता, प्रिय व्यक्ति की चर्चा, जिसका वियोग हो गया उसी की यादें यह सब वही तुम्हारी समाप्त हो जाएगी अगर तुम अपनी सीट पर आ जाते हो। हमको परिस्थितियां इसलिए कुचलती है क्योंकि हम अपनी सीट पर नहीं है। आप आत्मा में डट जाओ तो विपरीत से विपरीत परिस्थिति, महान दुख की परिस्थिति आपको दुख नहीं दे सकेंगी। सुख में बदल जाएगी।
  • जिसने तन मन को वश कर लिया वह तो भगवान हो गया और क्या? वह तो नारायण का अंग है।
  • कमजोर विचार को शत्रु समझकर काट डालो। जो भी दुर्बल विचार आए उसे कुचल दो। दुर्बल विचार कभी सत्य नहीं हो सकते। घृणा के विचार आये उसी समय उसे उखेड़ दो।
  • प्रत्येक व्यक्ति को, प्रत्येक दुनिया को निशंक हो कर देखें। उसके लिए हानि करने वाले के विचार बदल जाएंगे। कोई भी घटना घटी और दुख हो रहा है तो समझ लेना कि कचरा पेटी के निकट बैठे हैं। नजदीक नहीं कचरा पेटी में बैठे हैं।
  • जब भी दुख हो, जब भी भय हो, जब भी चिंता हो तो यह बात तो पक्की है कि हम कचरा पेटी में बैठे हैं। अगर यह याद आ गया तो निकल आओगे।
  • दुनिया की कोई भी चीज बिगड़ जाए तो हरकत नहीं लेकिन अपना ज्ञान नहीं बिगाड़ना चाहिए। अपनी समझ नहीं बिगाड़नी चाहिए। सब देखकर भी अपनी समझ बढती है तो सौदा सस्ता है और सब लेकर भी अपनी समझ का दिवाला होता है तो सौदा महंगा है।
  • अपने आत्म भाव में तुम बैठे बैठे आने जाने वाले सुख दुख को देखो।
  • मेरो चिंत्यो होत नाही, हरि को चिंत्यो होय। हरि चिंत्यो हरि करें, मैं रहूं निश्चिंत। तुम अपने स्वरूप में निश्चिंत रहो फिर देखो सब कैसे ठीक चलता है।
  • अच्छी जगह का एड्रेस मिलता है आश्रम में। इसलिए यह अच्छी जगह है। जैसे गरुड़ को देखकर सांप भाग जाते हैं वैसे ही ऐसे ज्ञान रूपी गारुड़ी मंत्र से दुख भाग जाते हैं।

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