प्रातः संध्या सत्संग सार 5 June 2021
Title- वेदांत की गरिमा
पूज्य बापूजी कहते हैं...
- पानी में डूबने वाले व्यक्ति का तो पैसा और परिवार छूटता है लेकिन संसार में डूबने वाले का तो सर्वस्व छूट जाता है।
- हमारे दिल में ईश्वर है या जगत है? भोग है की भगवान है? उसको कभी- कभी देखना चाहिए गहराई से, एकांत में, ईमानदारी से।
- जो संसार तरफ सच्चाई से लगे हैं तो उनको वैराग्य होता है। यदि वैराग्य नहीं होता है तो समझो कि ईमानदारी से संसार का व्यवहार नहीं है।
- भोगो में चार दोष है- (1) वे सदा मिलते नहीं (2) इंद्रियों में उनको भोगने का बल सदा रहता नहीं (3) मन में उनकी रुचि सदा नहीं रहती (4) भोक्ता सदा नहीं रहता
- दो प्रकार के लोग होते हैं- (1) दूसरे के परिश्रम से भोग भोगना चाहते हैं (2) सच्चाई से ईमानदारी से भोग भोगना चाहते हैं।
- भोगी को हजार हजार भोग भोगने पर भी वह सुख नहीं मिलता जो सुख महापुरुषों के सानिध्य में बैठने मात्र से मिलता है
- जिसको इसी जन्म में संसार से पार होना हो उसको "ईश्वर की ओर" नाम की पुस्तक बार- बार पढ़नी चाहिए। यदि संसार से मन को उपराम करके भगवान में लगाना हो तो नहीं तो खतरा है। जिसको आत्म सुख चाहिए, जिसको अपना सौभाग्य चमकाना है, अपने 21 कुल को तारना है वे लोग पढ़े दूसरे नहीं। मूरों के संग में हमारा विवेक नाश हो रहा है। पामर व्यक्तियों के, लोभियों के, संसार में लंपट व्यक्तियों के संपर्क में अधिक समय साधक भी रहता है तो उसकी भी अपनी योग्यता क्षीण होने लगती है।
- दुर्जन की करुणा बुरी, भलो साईं को त्रास। सूरज जब गर्मी करें, तब बरसन की आस। हम तुम्हें त्रास भी दे, डांटे, तुम पर अपने गुरुपद का वीटो पावर भी चला दे फिर भी तुम भूल कर भी दामन मत छोड़ना।
- वेदांत कोई भिखमंगा नहीं बनाता। वेदांत बेवकूफी छुड़ाता है। वेदांत तुम्हारे और ईश्वर के बीच की दूरी छुड़ा देता है।संत आपको वही चीज देना चाहते हैं जिससे आप धनवान होंगे। तुम पूरा का पूरा वेदांत को ना समझो, ना पाओ तो कम से कम आधा तो करो।
आज प्रातः संध्या का सत्संग आप मंगलमय एप के द्वारा भी सुन सकते हैं।
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