Gurubhakti Dhyan Side A Saar
देह में अहंता ममता, जगत में सत्यता, वृत्तियों की सत्यता, सुख और दुख में सत्य बुद्धि, जीवन और मौत में सद्बुद्धि, पद प्रतिष्ठा में रस आना अज्ञान का मूल है। जगत की कोई भी परिस्थिति में बंधजाना अज्ञान की महिमा है। जन्म जन्मांतर के जो कर्म है उनका निवारण करने का यदि किसी में सामर्थ्य है तो वह गुरु की चरण रज में है। जन्म जन्मांतर की बेवकूफी को दूर करने की कुंजी अगर है तो फकीरों के द्वार पर है।
सच्चे माता पिता फकीर ही होते हैं। हड्डी मांस के माता-पिता तो तुमने कई बार किए हैं। तुमने लाखों लाखों मां-बाप बदले होंगे, लेकिन जब कोई सद्गुरु मिलते है तो वह तुम्हें ही बदल देते है।
मेरे गुरुदेव ने एक बार ऐसी डांट चढ़ाई कि देखने वाले भयभीत हो गए। सद्गुरु के आगे अगर दिल खोल कर बात नहीं करोगे तो भीतर ही भीतर बोजा बढ़ाओगे जाओगे कहां?
बेवकूफी को छीनने वाले, ज्ञान और वैराग्य को भरने वाले, विवेक और शांति की छाया में रखने वाले, सदियों से भटकते हुए जीवात्मा संसार की सरिता में बहे जा रहे हैं उनको गुरु प्रेम का तिनका देकर, पूचकार का सहारा देकर, साधना का इशारा देकर उन्हें संसार सरिता से किनारे लगा देते हैं, जन्म मरण की भवाटीयों से पार करने के लिए सहारा दे देते हैं। सत्पुरुषों की कृपा है हम पर वही लोग थोड़ी बहुत अनुकंपा करते । हैं ।बाकी के लोग तो भगवान के नाम की दुकानें चलाते हैं।
जब भी गद्दारी की है तो चलो ने की है। शूली पर चढ़ाया है तो चेलो ने चढ़ाया है, गुरु ने कब शूली पर चढ़ाया? निंदा की है तो शिष्यों ने की है, विरोध किया है तो शिष्यों ने किया है, गद्दारी की है तो शिष्यों ने की है, गुरु ने कभी गद्दारी नहीं की। किसी सतगुरु ने समाज के साथ गद्दारी नहीं की फिर भी सद्गुरु शूली पर चढ़े हैं। सद्गुरु के चरणो में तो ब्रह्मा विष्णु और महेश के सिर झुक जाते हैं तुम्हारे हमारे सिर झुके तो बात ही क्या?
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